CTET Paper 1 · Hindi-CTET
पूरा काव्यांश: देशवासियों सुनो, देश को नमन करो। देश ही आधार है, प्यार देश से करो। लड़ रहे हो आज क्यों छोटी-छोटी बात पर, देश हित को भूलकर प्रांत, भाषा, जात पर। मिटा के भेदभाव को, देश को सुदृढ़ करो। भ्रष्टाचार की लहर उठ रही नगर-नगर, घोर अंधकार में सूझती नहीं डगर। ज्योति नीति-धर्म की आज तुम प्रखर करो। देश आज रो रहा, देश का रुदन सुनो, दर्द देश का, मित्र देश के बनो। प्रेम के पीयूष से, द्वेष का शमन करो। प्रश्न: कविता में नीति-धर्म की ज्योति प्रखर करने के लिए कहा गया है, ताकि—
- देश को प्रेम किया जा सके।
- देश का दर्द बाँटा जा सके।
- आपसी भेदभाव दूर किया जा सके।
- भ्रष्टाचार को दूर किया जा सके।
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