CTET Paper 1 · Hindi-CTET

गद्यांश: राजनीतिक बहसों की गर्मी में हम जो भी कहें, अपने राष्ट्रीय अभिमान की अभिव्यक्ति में हम जितना भी जोर से चीखें, सक्रिय राष्ट्रीय सेवा के प्रति हम अत्यंत उदासीन रहते हैं, क्योंकि हमारा देश प्रकाश से हीन है। मानव स्वभाव में निहित कंजूसी के कारण जिन्हें हमने नीचा रख छोड़ा है, उनके प्रति अन्याय से हम बच ही नहीं सकते। समय-समय पर उनके नाम पर हम पैसा इकट्ठा करते हैं, लेकिन उनके हिस्से में शब्द ही आते हैं, पैसा तो अंततः हमारी पार्टी के ही लोगों के पास पहुँचता है। संक्षेप में, जिनके पास बुद्धि, शिक्षा, समृद्धि और सम्मान है, हमारे देश के उस अत्यंत छोटे हिस्से, पाँच प्रतिशत और आबादी के अन्य पंचानवे प्रतिशत के बीच की दूरी समुद्र से भी अधिक चौड़ी है। प्रश्न: ‘जितना भी जोर से चीखें’ वाक्य में क्रिया है

  1. अकर्मक
  2. सकर्मक
  3. प्रेरणार्थक
  4. द्विकर्मक
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