CTET Paper 1 · Hindi-CTET

मानव इतिहास में हजारों साल तक शून्य का कहीं अता-पता नहीं था। शून्य की अवधारणा आ भी गई तब भी काफी समय तक मानव ने इसे संख्या नहीं समझा। यह बात तो तय है कि शून्य प्राकृतिक-प्रदत्त नहीं है। हमने शून्य का आविष्कार अपनी सुविधा के लिए किया है। मनुष्यों ने शून्य की अवधारणा को न केवल समझा है, बल्कि उसकी सहायता से कई स्वचालित उपकरणों का आविष्कार भी कर लिया है। शून्य एक ही समय में एक अमूर्त विचार और एक वास्तविकता है और यह सीखना सबसे मुश्किल है कि शून्य एक से छोटा है। सबसे पहले भारत ने ‘कुछ भी नहीं’ को दर्शाने के लिए शून्य को एक स्वतंत्र संख्या के रूप में मान्यता दी। अगर हम शून्य को एक, दो और तीन जैसी संख्याओं की तरह मूर्त चीजों से सम्बद्ध कर पाते तो शायद शून्य को समझाना बहुत आसान होता। प्रश्न: ‘शून्य एक ही समय में एक अमूर्त विचार और एक वास्तविकता है।’ का आशय है -

  1. यह दिखाई नहीं देता, परन्तु इसका अस्तित्व है।
  2. संख्याओं में महत्वपूर्ण स्थान धारक है।
  3. यह दिखाई देता है पर इसे किसी शब्द में सुन नहीं सकते हैं।
  4. यह अदृश्य है पर इसे सुन सकते हैं।
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