CTET Paper 1 · Hindi-CTET

विघ्नों को गले लगाते हैं। काँटों में राह बनाते हैं॥ है कौन विघ्न ऐसा जग में टिक सके आदमी के मग में, खम ठोंक ठेलता है जब नर पर्वत के जाते पाँव उखड़, मानव जब जोर लगाता है। पत्थर पानी बन जाता है॥ गुण बड़े एक से एक प्रखर हैं छिपे मानवों के भीतर, मेहंदी में जैसे लाली हो वर्तिका बीच उजियाली हो, बत्ती जो नहीं जलाता है। रोशनी नहीं वह पाता है॥ प्रश्न: कवि के अनुसार मनुष्यों में गुण किस प्रकार छिपे रहते हैं?

  1. मेहंदी में जैसे लाली हो
  2. पूरब में जैसे सूरज हो
  3. प्रकृति में हरियाली हो
  4. सागर में पत्थर हो
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