CTET Paper 1 · Hindi-CTET
गद्यांश/पद्यांश: चिड़िया तू जो मगन, धरा मगन, गगन मगन फैला ले पंख ज़रा, उड़ तो सही, बोली पवन। अब जब हौंसले से, घोंसले से आई निकल चल बड़ी दूर, बहुत दूर, जहां तेरे सजन। वृक्ष की डाल देखें जंगल-ताल दिखें खेतों में झूम रही धान की बाल दिखें गाँव-देहात दिखें, रात दिखे, प्रात दिखे चिड़िया तू जो मगन.... Question: ० कविता का मूल स्वर है- खुल कर घूम यहाँ, यहाँ नहीं A की घुटन
- प्रकृति
- मुक्ति
- पशु-पक्षी
- हौंसला
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