CTET Paper 1 · Hindi-CTET

गद्यांश: आज पूरी दुनिया, नयी-पुरानी, पढ़ी-लिखी, अनपढ़ दुनिया भी इन्हीं प्लास्टिक की थैलियों को लेकर एक अंतहीन यात्रा पर निकल पड़ी है। छोटे-बड़े बाज़ार, देशी-विदेशी दुकानें हमारे हाथों में प्लास्टिक की थैली थमा देती हैं। हम इन थैलियों को लेकर घर आते हैं। कुछ घरों में ये आते ही कचरे में फेंक दी जाती हैं तो कुछ साधारण घरों में कुछ दिन इनके इस्तेमाल का सिलसिला चल पड़ता है, फिर किसी और दिन कचरे में डालने के लिए। इस तरह आज नहीं तो कल कचरे में फेंक दी गयी इन थैलियों को फिर हवा ले उड़ती है, एक और अंतहीन यात्रा पर। फिर यह हल्का कचरा ज़मीन पर उड़ते हुए नदी-नालों में पहुँच कर बहने लगता है और फिर वहाँ से बहते-बहते समुद्र में। यहाँ भी एक और अंतहीन यात्रा शुरू हो जाती है। खोज करने वालों ने इस प्लास्टिक की समुद्री यात्रा को समझने की कोशिश की है। उन्हें यह जानकर अचरज हुआ कि हमारे घरों से निकला यह प्लास्टिक का कचरा अब समुद्र में भी खूब बड़े-बड़े ढेरों की तरह तैर रहा है। न वह ज़मीन पर गलता है, सड़ता है, न समुद्र में ही। यह प्लास्टिक तो आत्मा की तरह अजर-अमर है। प्लास्टिक के फैलते-पसरते व्यवहार को कई देशों ने, कई समाजों ने अपनी-अपनी तरह से रोकने के कई प्रयत्न किए हैं। कुछ देशों ने इस पर प्लास्टिक टैक्स लगा कर देखा है। ऐसा टैक्स लगाते ही खपत में एकदम गिरावट भी देखी गयी है। कहीं-कहीं इन पर सीधे प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसके बदले फिर अखबार, कागज़, कपड़े की थैलियाँ, लिफाफे भी चलन में आए हैं। दुकानों से घर तक चीज़ें लाने का माध्यम इतनी कम उम्र का क्यों हो, वह चिरंजीव क्यों न बने—प्लास्टिक के कारण अब ऐसे सवाल भी हमारे मन में नहीं उठ पाते। प्लास्टिक की समुद्री यात्रा देखकर आश्चर्य क्यों हुआ?

  1. प्लास्टिक अजर-अमर है
  2. समुद्र में चारों ओर प्लास्टिक की थैलियाँ थीं
  3. घरों का प्लास्टिक कचरा समुद्र में तैर रहा था
  4. समुद्र में प्लास्टिक सड़ गया था
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