CTET Paper 1 · Hindi-CTET
गद्यांश: चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति पर वैज्ञानिकों को कभी संदेह नहीं रहा। जिन लोगों ने घर पर चिंपैंजी पाले हैं, उन्होंने देखा है कि जन्म के बाद ये बच्चे मानव-शिशुओं की अपेक्षा पाँच-छः गुना तेजी से नयी बातें सीख जाते हैं। हाँ, जब मानव-शिशु बोलना सीख जाता है, वह चिंपैंजी के शिशु से तेजी से आगे निकलने लगता है। सूँस और चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति की तुलना करना अति कठिन है, क्योंकि इस तरह के दो अत्यंत भिन्न जीवों पर तुलनात्मक प्रयोग कर पाना लगभग असम्भव होता है। इसी तरह की कठिनाई इसी तरह के अन्य प्रयोगों में भी आती है। उदाहरण के लिए, भूल-भुलैया में सही मार्ग खोज निकालना तथा मेज पर रखी तीन वस्तुओं में अटपटी वस्तु को चुन निकालना एक-सी बुद्धिशक्ति के प्रमाण हैं। एक बात से प्रायः सभी वैज्ञानिक सहमत हैं कि पशुओं में स्तनपायियों का बुद्धिमत्ता पर लगभग एकाधिकार है। औज़ारों का प्रयोग करना भी बुद्धिमानी का एक चिह्न है। गालापगोस द्वीप का कठफोड़वा कैक्टस में रहने वाले कीड़े को निकालने के लिए काँटा तोड़कर चोंच में रखता है। शिकारी की बंदूक की पहुँच से दूर रहने की कला कौआ बखूबी जानता है। कुछ वैज्ञानिकों का खयाल है कि काग और तोते में मनुष्य की बोली के चंद शब्द सीखने की क्षमता केवल आनुवंशिक क्षमता नहीं, बल्कि बुद्धिशक्ति का प्रमाण है। कुछ लोग हाथी को सबसे बुद्धिमान जीव मानते हैं। गद्यांश में वर्णित बुद्धिमान प्राणियों का समूह नहीं है:
- सूँस, तोता, कौआ
- सूँस, हाथी, बंदर
- चिंपैंजी, तोता, काग
- चिंपैंजी, सूँस, हाथी
Answer and detailed solution are available in the protected study screen.
Register or login to attempt