CTET Paper 1 · Hindi-CTET
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए। इन दिनों फिर से हिंदी बनाम क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर शोर मचा है। इसमें कुछ चीजें समझने वाली हैं। सबसे पहले तो यही कि हिंदी हमारी मातृभाषा हो सकती है, लेकिन कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल समेत अन्य प्रांतों में जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए यह मातृभाषा नहीं हो सकती। जितना प्रेम हमें हिंदी से है, उतना ही प्रेम पंजाब में जन्मे व्यक्ति को पंजाबी से, कर्नाटक में जन्मे व्यक्ति को कन्नड़ से और तमिलनाडु में जन्मे व्यक्ति को तमिल से होगा। हिंदी राजभाषा है, उसका सम्मान सर्वोपरि है, मगर हमें यह भी ध्यान में रखना होगा कि हिंदी का सम्मान करने के अति उत्साह में कहीं हम अन्य भाषाओं का अपमान तो नहीं कर रहे? जैसे हमारी माता, वैसे ही सबकी माता। हिंदी हमारी मातृभाषा है, तो कन्नड़, तमिल, पंजाबी, तेलुगु, मलयालम आदि भी किसी न किसी की मातृभाषा हैं। हिंदुस्तान हमारा राष्ट्र है, हिंदी इसकी एक प्रमुख भाषा है, लेकिन तमिल, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगु, मलयालम आदि भी इसी राष्ट्र में बोली जाने वाली भाषाएँ हैं, जिनका बराबर सम्मान होना चाहिए। तभी हम गर्व से कह पाएँगे कि अनेकता में एकता हमारी सभ्यता है। 'अनेकता में एकता हमारी सभ्यता है।' वाक्य से आशय है:
- विविधता होते हुए भी हम सब एक हैं
- विविधता में एकता पुरानी बात हो गई है
- विविधता ही किसी राष्ट्र की पहचान होती है
- विविधता से ही समस्या आती है
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