CTET Paper 1 · Hindi-CTET
कविता: पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले। है अनिश्चित किस जगह पर, सरित गिरि गह्वर मिलेंगे; है अनिश्चित किस जगह पर बाग वन सुंदर मिलेंगे। किस जगह यात्रा खत्म हो जाएगी यह भी अनिश्चित; है अनिश्चित कब सुमन कब कंटकों के शर मिलेंगे। कौन सहसा छू जाएँगे, मिलेंगे कौन सहसा; आ पड़े कुछ भी रुकेगा तू न ऐसी आन कर ले। पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले। प्रश्न: कविता की पंक्तियों में कवि व्यक्ति को किस बात की प्रेरणा दे रहा है?
- हर स्थिति में साहस दिखाने की
- पर्वतों को देखकर न डरने की
- गहरी नदियों से न डरने की
- हर स्थिति में आगे बढ़ने की
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