CTET Paper 1 · Hindi-CTET
कविता: विविध प्रांत हैं अपनी-अपनी भाषा के अभिमानी हम, पर इन सबसे पहले दुनियावालो हिन्दुस्तानी हम। रहन-सहन में, खान-पान में, भिन्न भले ही हों कितने, इस मिट्टी को देते आए, मिल-जुलकर कुर्बानी हम। सदियों से कुचले लाखों तूफ़ान हमने पद तल से, आज झुके कुछ टकराकर तो कल लगते फिर जाने से। अंडमान से कश्मीर भले ही दूर दिखाई दे कितना, पर हर प्रांत जुड़ा है अपना आणविक कोमल धागों से। जिस ओर बढ़ाए पग हमने, हो गई उधर भू नव मंगल। आज़ाद वतन के बाशिंदे, हर चरण हमारा है बादल।। प्रश्न: कविता के अनुसार विविधताओं के बीच भी हम एक हैं, क्योंकि सबसे पहले हम
- स्वाभिमानी हैं।
- भारतीय हैं।
- वीर-बहादुर हैं।
- स्वतंत्र हैं।
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