CTET Paper 1 · Hindi-CTET

गद्यांश: अहंकार में इंसान के चरित्र को पतन की ओर ले जाने वाली प्रवृत्तियाँ हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अहं भाव का त्याग कर समभाव और सद्भाव से जीवन जीने का प्रयत्न करना चाहिए। अगर कोई अपने आपको सर्वश्रेष्ठ मानता है तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है क्योंकि दुनिया में हर किसी से बड़ा कोई न कोई अवश्य होता है। सृष्टि के निर्माता ने ऐसा चक्र बनाया है कि कोई भी अपने आपको दुनिया में सर्वश्रेष्ठ नहीं समझ सकता। अगर समझता है तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है। भगवान बुद्ध के अनुसार दिखावा और घमंड अच्छे प्रयोजन से किए गए कार्यों को भी मलिन कर देते हैं। इसकी वजह से हमारा मान-सम्मान कम हो जाता है। अगर मन को शांत रखना है तो घमंड से बचना चाहिए। प्रश्न: गद्यांश के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को कैसा जीवन जीना चाहिए?

  1. समभाव और समानता का
  2. समानता और न्याय का
  3. प्रेम और सद्भाव का
  4. सद्भाव और समभाव का
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