CTET Paper 1 · Hindi-CTET
कविता: जीवन अस्थिर अनजाने ही, हो जाता पथ पर मेल कहीं, सीमित पग डग, लंबी मंज़िल, तय कर लेना कुछ खेल नहीं। दाएँ-बाएँ सुख-दुख चलते, सम्मुख चलता पथ का प्रसाद, जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला, उस-उस राही को धन्यवाद। प्रश्न: कवि अपने जीवन में किन्हें धन्यवाद देना चाहता है?
- खेल दिखाने वाले को
- पीछे चलने वाले राही को
- प्रेरणा देने वाले को
- स्नेह देने वाले को
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