CTET Paper 1 · Hindi-CTET

गद्यांश: लघु उद्योग उन उद्योगों को कहा जाता है जिनके समारंभ एवं आयोजन के लिए भारी-भरकम साधनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे थोड़े-से स्थान, थोड़ी पूँजी और अल्प साधनों से ही आरम्भ किए जा सकते हैं। फिर भी उनसे सुनियोजित ढंग से अधिकाधिक लाभ प्राप्त करके देश की निर्धनता, गरीबी और विषमताओं से एक सीमा तक लड़ा जा सकता है। अपने आकार-प्रकार तथा साधनों की लघुता व अल्पता के कारण ही इस प्रकार के उद्योग-धंधों को कुटीर-उद्योग भी कहा जाता है। इस प्रकार के उद्योग-धंधे अपने घर में भी आरम्भ किए जा सकते हैं और अपने सीमित साधनों का सदुपयोग करके आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है और सुखी-समृद्ध बना जा सकता है। भारत जैसे देश के लिए तो इस प्रकार के लघु उद्योगों का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ युवाओं की एक बहुत बड़ी संख्या बेरोजगार है। इसी कारण महात्मा गांधी ने मशीनीकरण का विरोध किया था। उनकी यह स्पष्ट धारणा थी कि लघु उद्योगों को प्रश्रय देने से लोग स्वावलम्बी बनेंगे, मजदूर-किसान फसलों की बुआई-कटाई से फुर्सत पाकर अपने खाली समय का सदुपयोग भी करेंगे। इस प्रकार आर्थिक समृद्धि तो बढ़ेगी ही, साथ ही लोगों को अपने घर के पास रोजगार मिल सकेगा। प्रश्न: ‘विषमता’ का विपरीतार्थी है:

  1. समानता
  2. असमानता
  3. प्रतिकूलता
  4. सामान्यतः
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