CTET Paper 1 · Hindi-CTET

गद्यांश: जीवन में रौनक तब है, जब वह बड़े सहज और सरल तरीके से बिना किसी प्रपंच के जिया जाए। जीवन जैसा निश्चल, निष्कपट है, वैसा ही जिया जाए तो जीना वरदान बन जाता है। जीवन जैसा मिला है उसको हम वैसा ही जीते हैं, तो यह जीवन का सम्मान होता है। अधिकतर हम जैसा जीवन है, उसे छोड़ दिखावे का जीवन जीने लगते हैं। यह दिखावे का जीवन हमें बाहर तो अपने को कुछ बड़ा दिखाने में मदद करता है, लेकिन भीतर से खोखला भी करता चलता है। क्योंकि आडंबर से भरा जीवन अहंकार पर आधारित होता है और अहंकार हमारी जीवंतता को खा जाता है। अहंकार में हम केवल बाहर की तरफ देखकर जीते हैं जबकि जीवन कहीं भीतर बह रहा होता है। प्रश्न: गद्यांश के अनुसार ‘अहंकार में हम केवल बाहर की तरफ देखकर जीते हैं।’ वाक्य का आशय है कि __________ ।

  1. अहंकार हमें दूर तक देखने की शक्ति प्रदान करता है।
  2. अहंकार हमें दिखावटी जीवन व्यतीत करने की ओर ले जाता है।
  3. अहंकार हमें निश्चल जीवन व्यतीत करने की ओर ले जाता है।
  4. अहंकार हमें सर्वस्व प्राप्त करने की ओर ले जाता है।
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