CTET PAPER 2 · Hindi

अनुकूलित गद्यांश-संदर्भ: संगीत को आनंद की सहज अभिव्यक्ति, ललित कला और सार्वभौमिक कला बताया गया है। संगीत स्वर और लय से मन की भावनाएँ व्यक्त करता है। उसका आनंद पाने के लिए सुनने की कला विकसित करनी पड़ती है। संगीत मनोरंजन के साथ मन की अच्छाई को जगाकर हमें संस्कारित भी करता है। संगीत का आनंद लेने के लिए कौन-सी क्षमता विकसित करना आवश्यक बताया गया है?

  1. संगीत का सैद्धांतिक ज्ञान
  2. संगीतज्ञ की पहचान
  3. सुरीला कंठ
  4. सुनने की कला
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