CTET PAPER 2 · Hindi
अनुकूलित गद्यांश-संदर्भ: लेखक कहता है कि व्यंग्य में निरंतरता के साथ नवीनता जरूरी है। व्यंग्यकार बार-बार स्वयं को दोहराए तो रचना का प्रभाव घटता है। सार्थक और सुमधुर भाषा व्यंग्य को शक्ति देती है; प्रभावी व्यंग्य केवल कठोर प्रहार नहीं, बल्कि परिस्थितियों को विशिष्ट और अर्थपूर्ण ढंग से सामने लाने की कला है। गद्यांश में निरंतर लेखन के किस खतरे की ओर संकेत है?
- एक साथ बहुत-सी रचनाएँ प्रकाशित हो जाना
- पाठकों की संख्या बढ़ जाना
- पिछली रचनाओं का कलेवर नई रचनाओं में दोहराने लगना
- हर रचना का बहुत छोटी हो जाना
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