CTET PAPER 2 · Hindi

अनुकूलित गद्यांश-संदर्भ: लेखक कहता है कि व्यंग्य में निरंतरता के साथ नवीनता जरूरी है। व्यंग्यकार बार-बार स्वयं को दोहराए तो रचना का प्रभाव घटता है। सार्थक और सुमधुर भाषा व्यंग्य को शक्ति देती है; प्रभावी व्यंग्य केवल कठोर प्रहार नहीं, बल्कि परिस्थितियों को विशिष्ट और अर्थपूर्ण ढंग से सामने लाने की कला है। 'व्यंग्य निरंतरता की मांग करता है' का आशय क्या है?

  1. निरंतर लेखन में भी हर रचना में नवीनता बनी रहनी चाहिए
  2. लेखन बिना रुके चलता रहना चाहिए
  3. हर अगली रचना में पिछली रचना दोहरानी चाहिए
  4. हर साहित्यिक विधा में व्यंग्य होना चाहिए
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