DSSSB · Hindi

पूरा गद्यांश: प्रयोग, परीक्षण और अन्वेषण विज्ञान की तीन अवस्थाएँ मानी जाती हैं। इसके पीछे मूल ___1___ यह है कि प्रत्येक वस्तु की प्रामाणिक अवस्था का सही ___2___ बारंबार प्रयोग द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है। कोई तथ्य अंतिम नहीं है, इसलिए प्रयोग की प्रक्रिया चलती रहती है। हर प्रयोग सही न हो, पर वह नए ___3___ के लिए महत्वपूर्ण जरूर होता है। प्रयोगों द्वारा ही सत्य के नए-नए आयाम का विकास होता है। इसलिए माना जाता है कि मानवीय ___4___ के लिए प्रयोगों की निरंतरता अनिवार्य है। प्रयोग के विचारों को जब साहित्य पर लागू किया गया, उससे ___5___ का जन्म हुआ। इसने परंपरावादी चिंतन के सामने कई प्रश्न खड़े कर दिए। यह भी अनुभव किया गया कि परंपरा और जीवन के यथार्थ को प्रयोग द्वारा ही समझा जा सकता है। प्रश्न: उपर्युक्त अपठित गद्यांश के रिक्त स्थान 4 में उचित शब्द की पूर्ति कीजिए-

  1. साहित्य
  2. सामने
  3. जिज्ञासा
  4. पर लागू
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