DSSSB · Hindi
पूरा गद्यांश: 23 मार्च 1940 को मुस्लिम लीग ने उपमहाद्वीप के मुस्लिम बहुल इलाकों के लिए स्वायत्तता का प्रस्ताव पेश किया। इस अस्पष्ट-से प्रस्ताव में कहीं भी विभाजन या पाकिस्तान का जिक्र नहीं था। प्रस्ताव को लिखने वाले पंजाब के प्रधानमंत्री सिकंदर हयात खान ने 1 मार्च 1941 को पंजाब असेम्बली में कहा था कि वह ऐसे पाकिस्तान की अवधारणा का विरोध करते हैं जिसमें “यहाँ मुस्लिम राज और बाकी जगह हिंदू राज होगा। अगर पाकिस्तान का मतलब यह है कि पंजाब में खालिस मुस्लिम राज कायम होने वाला है तो मेरा उससे कोई वास्ता नहीं है।” कुछ लोग मानते हैं कि पाकिस्तान की मांग सर्वप्रथम मोहम्मद इकबाल की थी, जिन्होंने “सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा” लिखा था। 1930 में मुस्लिम लीग के अधिवेशन में अध्यक्षीय भाषण देते हुए उन्होंने एक “उत्तर-पश्चिमी भारतीय मुस्लिम राज्य” की जरूरत पर जोर दिया। भाषण में इकबाल पश्चिमोत्तर भारत में मुस्लिम बहुल इलाकों को एकीकृत, शिथिल भारतीय संघ के भीतर एक स्वायत्त इकाई की स्थापना पर जोर दे रहे थे। प्रश्न: सिकन्दर हयात खान ने कब ऐसे पाकिस्तान की अवधारणा का विरोध किया था, जिसमें "यहाँ मुस्लिम राज बाकी जगह हिन्दू राज होगा...."
- 13 मई 1944 को
- 20 अप्रैल 1943 को
- 1 मार्च 1941 को
- 10 मार्च 1942 को
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