DSSSB · Hindi
गद्यांश: गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए- यदि साहित्य ने अमीरों के याचक बनने को जीवन का सहारा बना लिया हो और उन आंदोलनों, हलचलों और क्रांतियों से बेख़बर हो जो समाज में हो रही हैं- अपनी ही दुनिया बनाकर उसमें रोता और हँसता हो, तो इस दुनिया में उसके लिए जगह न होने में कोई अन्याय नहीं है। इसमें शक नहीं है कि साहित्यकार पैदा होता है बनाया नहीं जाता; पर यदि हम शिक्षा और जिज्ञासा से प्रकृति की इस देन को बढ़ा सकें, तो निश्चय ही हम साहित्य की अधिक सेवा कर सकेंगे। अरस्तू ने और दूसरे विद्वानों ने भी साहित्यकार बनने वालों के लिए कड़ी शर्तें लगाई हैं; और उनकी मानसिक, नैतिक, आध्यात्मिक और भागवत सभ्यता और शिक्षा के लिए सिद्धांत और विधियाँ निश्चित कर दी हैं; मगर आज तो हिंदी में साहित्यकार के लिए प्रवृत्तिमात्र अलम समझी जाती है और किसी प्रकार की तैयारी की उसके लिए आवश्यकता नहीं। वह राजनीति, समाजशास्त्र या मनोविज्ञान से सर्वथा अपरिचित हो, फिर भी वह साहित्यकार है। प्रश्न: आध्यात्मिक का विलोम बताइए-
- तटस्थ
- भौतिक
- सार्ववजनिक
- वीतरागी
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