DSSSB · Hindi

गद्यांश: एक भारतीय आत्मा: माखनलाल चतुर्वेदी हिन्दी के उन गिने-चुने कवियों में से एक हैं जिनका ओजस्वी स्वर राष्ट्रीय चेतना को आज भी उद्दीप्त कर रहा है और भविष्य में भी उनकी कीर्ति-लता कभी मुरझाएगी नहीं। उनके व्यक्तित्व में क्या नहीं है। वह एक साथ कवि, पत्रकार, नाटककार, चिंतक और शैलीकार थे। राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत काव्य-भाषा, छायावादी भाव-सुषमा यदि कहीं उपलब्ध है तो एकमात्र उनकी रचनाओं में ही। वह स्वदेशी भावना के कट्टर पक्षधर थे। इसीलिए उनकी रचनाएँ कृत्रिमता से दूर सहजता की द्योतक हैं। उनका जन्म 4 अप्रैल सन् 1889 को खंडवा, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनकी जीवनशैली और काव्यशैली समकालीनों में सबसे भिन्न और चित्ताकर्षक थी। उनकी राष्ट्रीय विचार-भावना से जुड़ी कविताओं में समर्पण की भावना सर्वोपरि है। प्रश्न: माखनलाल चतुर्वेदी की राष्ट्रीय विचार-भावना से जुड़ी कविताओं में कौन-सा भाव सर्वोपरि है?

  1. नैतिकता
  2. कट्टरता
  3. त्याग
  4. समर्पण
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