DSSSB · Hindi
‘समरथ को नहिं दोष गोसाईं ’ लोकोक्ति का अर्थ है -
- हमें अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करना चाहिए।
- मेहनत से किये काम में सदैव सफलता मिलती है।
- बड़े आदमी पर कोई दोष नहीं लगाता।
- बड़े आदमी के सब मित्र होते हैं।
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